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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अनुसूचित जातियों के बीच भाजपा का 'स्वाभिमान सम्मेलन'

सिद्धांत मोहन, TwoCircles.net

वाराणसी : भले ही सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों द्वारा जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने को अवैध करार दे दिया हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का हालिया कैम्पेन इस आदेश को आड़े हाथों लेता नज़र आ रहा है.

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के कई क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों के साथ स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन कर रही है.

बनारस के बुनकर : न खाते हैं, न बुनते हैं, न पढ़ते हैं और कमाते हैं बेहद मुश्किल से

सिद्धांत मोहन, TwoCircles.net

वाराणसी: हिन्दी के कथाकार अनिल यादव की एक कहानी बहुत प्रचलित है. कहानी का शीर्षक है 'दंगा भेजियो मौला'. बनारस की बुनकर बस्ती बजरडीहा की त्रासदी इस कहानी में एक ज़रूरी दस्तावेज़ के रूप में सामने आती है. इस कहानी में ज़िक्र है कि जब बजरडीहा के हथकरघों में सीवर का पानी भर जाता है, सीवर का उफनाया पानी जब घरों को टापू में तब्दील कर देता है तो इस मोहल्ले के लोग मदद के लिए दंगों का इंतज़ार करते हैं.

अल्पसंख्यकों के बजट के साथ खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

नई दिल्ली: मोदी सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) मुख्‍तार अब्‍बास नक़वी ने आने के साथ ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. उनके द्वारा मुसलमानों के हक़ की सबसे महत्वाकांक्षी स्कीम के पर कतरने की क़वायद शुरू हो गई है.

आरबीआई मार्च तक बिहार में खुलवाए बाक़ी की 1640 बैंक शाखाएं - अब्दुल बारी सिद्दीक़ी

TwoCircles.net Staff Reporter

पटना : नोटबंदी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की जमकर आलोचना के बाद अब बिहार के वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीक़ी के निशाने पर बैंक हैं.

वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीक़ी के मुताबिक़ बिहार में बैंकों की काफी कमी है. यहां 17 हज़ार की आबादी पर एक बैंक शाखा है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 11 हज़ार की आबादी पर एक शाखा स्थापित की गई है. ऐसे में अगर बैंक अपना लक्ष्य पूरा करते तो शायद लोगों को ख़ासतौर पर नोटबंदी के बाद जो परेशानियां हो रही हैं, वो नहीं होतीं.

उर्दू के नाम पर मुख्तार अब्बास नक़वी का धोखा!

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

नई दिल्ली : उर्दू ज़बान को हमेशा से मुसलमानों के साथ जोड़कर मुसलमानों को बेवक़ूफ़ बनाने काम किया गया है. इसकी ताज़ा मिसाल यह कहानी है.

उर्दू अदब की गिरी हालत को सुधारने के बजाए मोदी सरकार भी सिर्फ़ झूठ व फ़रेब का सहारा लेकर अपने नंबर बढ़ाने और मीडिया में अपनी छवि चमकाने की कोशिश पर टिकी हुई है, मगर जो हक़ीक़त है वो बेहद ही तल्ख़ और दुखद है.

नोटबंदी : गरीबों को प्रभावित करने वाला फैसला अच्छा कैसे हो सकता है - प्रभात पटनायक से बातचीत

नोटबंदी : गरीबों को प्रभावित करने वाला फैसला अच्छा कैसे हो सकता है - प्रभात पटनायक से बातचीत

चेतना त्रिवेदी / रवि प्रकाश

आपके अनुसार काला धन क्या है और हमें इसको नियंत्रित करने की आवश्यकता क्यों है?

केंद्र सरकार की अनदेखी और ख़तरे में एएमयू का किशनगंज सेन्टर

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

किशनगंज (बिहार) : बिहार के किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का सेन्टर राजनीति के मकड़जाल में उलझ कर रह गया है. इस केंद्र के लिए जो जगह दी गई है, वह महानंदा नदी से सटी हुई है. हालत ये है कि महानंदा के कटाव-क्षेत्र में ही इस केंद्र का एक बड़ा हिस्सा उपयोगिता के लिहाज़ से बेकार हो चला है. और जो पैसे इस केंद्र के नाम पर आवंटित किए गए थे, उनसे किसी भी ठोस कार्य की शुरूआत नहीं की जा सकी है.

क्या अखिलेश के साथ है समाजवादी पार्टी का फेसबुक पेज?

सिद्धांत मोहन, TwoCircles.net

वाराणसी : बीते दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल करते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अपने भाई रामगोपाल यादव को छः सालों के लिए पार्टी से ही निष्कासित कर दिया है.

इसके एक दिन पहले मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टियों के प्रत्याशियों की सूची जारी की थी.

लेकिन बड़ी खबर यह है कि समाजवादी पार्टी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर न मुलायम सिंह यादव द्वारा जारी की गयी प्रत्याशियों की सूची के बारे में कोई खबर है, ना ही रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव के निलंबन की कोई सूचना मौजूद है.

मोदी को चौराहे पर लाकर सज़ा देने की बात कही तो बृजेश यादव पर दर्ज हो गया मुक़दमा

TwoCircles.net Staff Reporter

लखनऊ : नोटबंदी को लेकर अगर आपने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चौराहे पर लाकर सज़ा देने की बात लिख रहे हैं तो ज़रा संभल जाईए. कहीं आपका ये पोस्ट आपको जेल न पहुंचा दे. कहीं बृजेश यादव की तरह आप पर भी मुक़दमा न दर्ज कर लिया जाए.

इबरार रज़ा : दलित-मुसलमानों में जागरूकता लाने की एक मिसाल

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

पटना (बिहार) : अच्छी-ख़ासी नौकरी छोड़कर ग़रीबों के लिए कुछ बेहतर कर सकने का जज़्बा इबरार अहमद रज़ा के लिए किसी मंज़िल की तरह है. ये वो मंज़िल है, जिसके लिए इबरार ने सुख-सुकून और आराम की नौकरी की सारी वजहें दरकिनार कर दीं. रिलायंस जैसे संस्थानों के एक कम्पनी में काम कर रहे इबरार आज की तारीख़ में गरीबों व मज़लूमों के हित के ख़ातिर दिन रात लगे हुए हैं.

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